अपनी प्रसन्नता को भी दांव पर लगाकर हम प्रयास करते हैं कि लोग हमें पसंद करें। यह सोचकर कि दूसरों की भावनाएं आहत न हों, शब्द हमारे होठों पर रुक जाते हैं। लोग क्या कहेंगे का भाव हमारी इच्छाओं और आकांक्षाओं को जकड़ लेता है। प्रसन्नता, स्वतन्त्र अभिव्यक्ति और उन्नति के लिए आवश्यक है कि हम अपने औपचारिक व्यवहार को मनोवैज्ञानिक कसौटी पर कसकर देखें। अपने मन को एक परिस्थिति दें और जानें कि आपका व्यवहार आपके आनंद को बाधित तो नहीं कर रहा।
आप रात्रि भोज पर आमंत्रित हैं और अचानक कोल्ड ड्रिंक का गिलास आपके कपड़ों और कारपेट पर गिर जाता है। प्रतिक्रिया में आप :
(क) बहुत फूहड़ महसूस करते हैं और शर्म छुपाने के लिए बाथरूम भाग जाते हैं।
(ख) एकदम पानी और रुमाल लेकर दाग मिटाने की कोशिश करते हैं।
(ग) बार-बार माफी मांगते हैं और अपनी बेवकूफी के लिए हीन अनुभव करते हैं।
आइए इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर आपके व्यक्तित्व का विश्लेषण करें।
(क) आपके विचारों से ऐसा आभास होता है कि आपका आत्मविश्वास बहुत जल्दी डगमगाने लगता है। आवश्यकता है कि आप अपने आत्मविश्वास और स्वाभिमान को सुदृढ़ करें। जरा सी कठिनाई में जो व्यक्ति समस्या का मुकाबला करने की बजाय मैदान छोड़ देता है, सफलता और विजय श्री उससे दूर रहती है।
(ख) आपमें समस्या को सुलझाने की शक्ति है और यह शक्ति आप जो चाहते हैं उसे पाने की दिशा में वरदान सिद्ध हो सकती है। गलती को स्वीकार करना और सुधारने का प्रयास आत्म विकास की पहली सीढ़ी है।
(ग) ऐसी परिस्थिति में क्षमा मांगने में कोई बुराई या आपत्ति नहीं है किन्तु बार-बार क्षमा याचना और स्वयं को निम्न मानना इस बात का द्योतक है कि आप में अनावश्यक ग्लानि भाव और दायित्व ओढ़ने की प्रवृत्ति है।
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