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स्त्री और प्रेम

 यह तस्वीरें उस मुश्किल सवाल का जबाब है जो अक्सर भारतीय पुरुष पूछते नजर आते हैं..."आखिर औरतें चाहती क्या हैं?" गौर से देखेंगे तो यह तस्वीरे सहज बता देंगी कि आखिर औरतें चाहती क्या है? औरतों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आपकी हैसियत क्या है? औरतों को फर्क पड़ता है कि क्या आपके मन मे औरतों के लिए क्या वाकई सम्मान है? अगर आपके मन मे एक औरत के लिए प्रेम व सम्मान होगा तो यकीन मानिए वो आपके व्यवहार में झलकेगा...अधिकांश पुरुषों के मन मे बचपन से औरत के प्रति प्रेम व सम्मान नहीं डाला जाता। पुरुषों के नजर मात्र एक औरत होती है जो सम्मान के लायक होती है वो है उनकी माँ...बाकी जितने भी रिश्ते है उनके मामले में पुरुषों को प्रेम और सम्मान से पेश आना सीखाया ही नहीं जाता...अपने जीवनसाथी के प्रति अगर कोई पुरुष प्रेमपूर्ण व सम्मान की दृष्टि रखता है तो यही समाज उसे जोरु के गुलाम नाम से बुलाता है..






.बुरा मत मानियेगा पर भारत मे मर्द होने का मतलब है कि आप अपने घर की औरत को कितना नियंत्रण में रखते हैं इससे लगाया जाता है...जबकि मेरा मानना है कि असली मर्द होने की पहचान यह नहीं है...अगर एक स्त्री चाहे वो रिश्ते में कोई भी हो वो आपके करीब सुरक्षित और प्रसन्नचित्त महसूस कर रही तब समझिए कि आप असली मर्द हैं। आप पुरुष हैं और अगर आपने स्त्री के प्रति (चाहे कोई रिश्ता हो या न हो) प्रेमपूर्ण व सम्मानजनक तरीके से पेश आना नहीं सीखा तो यकीन मानिए आप कितना बड़ा पद हासिल कर लें...आप अधूरे रहेंगे..एक स्त्री को अपने पूर्ण वैभव में प्रकट होने के लिए सिर्फ आपसे "बेहद प्रेम व सम्मान" चाहिए...वो भी सिर्फ अंतरंग पलों में नहीं बल्कि हर वक्त...हर समय...जो पुरुष इस रहस्य को जानते हैं वो हमेशा सही अर्थों में समृद्ध होते हैं।

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