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Showing posts from March, 2015
                                    महत्व संकल्प  और प्रतिज्ञा  का   एक लड़का सदा अपनी मेज़ पर ' पी ' लिख कर रखता था। वह अपनी किताबों और कॉपियों पर भी सदा ' पी ' लिख दिया करता था। घर पर भी उसने जगह- जगह पर ' पी ' लिख छोड़ा था। लोग हैरान होते थे , पर वह किसी को कुछ नहीं बताता था। धीरे-धीरे लोगों ने पूछना छोड़ दिया।   हाई स्कूल केबाद वह  कॉलेज में दाखिल हुआ। वहांभी ' पी ' लिखने का उसका वह क्रम चालू रहा। कुछ दिनों तक लड़के आपस में चर्चा भी करते रहे , पर कोई उसके रहस्य को नहीं समझ सका। आखिर में सहपाठियों ने मज़ाक में उसका नाम ही ' पी साहब ' रख दिया। पर वह क़तई परेशान नहीं हुआ। पढ़ाई में वह खूब मन लगाता था , अत: एमए में फर्स्ट डिविज़न पास हुआ , और उसे अपने ही स्कूल में प्रिंसिपल की नौकरी मिल गई। प्रिंसिपल बनकर जब वह पहले दिन स्कूल में आया तो छात्रों को अपने ' पी ' लिखने का रहस्य बताया , बचपन से ही मेरी कामना थी कि अपने स्कूल का प्रिंसिपल बनूं। इसी को याद रखने के लिए सदा ...