क्या ईश्वर सिर्फ ज्ञानी और मंत्रोचार जानने वालो पर ही अपनी कृपादृष्टि विशेष रखते हैं? ये बातें वही कह सकता है जो वास्तविक ईश्वर का अर्थ नहीं भांप पाया..इतिहास साक्षी है कि ईश्वर का सानिध्य उसी ने अधिकतर पाया जो इन मामलों में अज्ञानी रहा..वे सबरी हों,अहिल्या जी हों,ध्रुव हों ,प्रह्लाद हों,कबीर हों,बुल्लेशाह हों,साईं हों,या रहीम हों...मरा मरा कहने वाले वाल्मीकि ब्रह्मऋषि बन गए...जानते हैं क्यों...अपनी श्रद्धा के कारण..आपके दैहिक शरीर की किसी भी क्रिया से ईश्वर को कुछ लेना देना नहीं..वो आपके भाव का भूखा है..आप तो ये ही नहीं जानते कि पूजा में आपके द्वारा जलाये जा रहे दीपक में डाला गया तेल किस जाति व किस धर्म के मनुष्य के खेत की सरसों का परिणाम है..आपको ये ही नहीं ज्ञात कि जिस फल को आप प्रभु को समर्पित कर रहे हैं वो कहाँ से आया है..इन्ही बकवास ढकोसलों के कारण आज हिन्दू धर्म से लोगों का मोह भंग हो रहा है व हमारी नयी जेनरेशन इससे कन्नी काटने पर तुली है..क्या जिस मनुष्य के पास वाणी न हो अथवा जो शिक्षित न हो व मंत्रो का उच्चारण करने में असमर्थ हो ,उसे ईश्वर की आराधना के उसके नैसर्गिक अधि...