यह तस्वीरें उस मुश्किल सवाल का जबाब है जो अक्सर भारतीय पुरुष पूछते नजर आते हैं..."आखिर औरतें चाहती क्या हैं?" गौर से देखेंगे तो यह तस्वीरे सहज बता देंगी कि आखिर औरतें चाहती क्या है? औरतों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आपकी हैसियत क्या है? औरतों को फर्क पड़ता है कि क्या आपके मन मे औरतों के लिए क्या वाकई सम्मान है? अगर आपके मन मे एक औरत के लिए प्रेम व सम्मान होगा तो यकीन मानिए वो आपके व्यवहार में झलकेगा...अधिकांश पुरुषों के मन मे बचपन से औरत के प्रति प्रेम व सम्मान नहीं डाला जाता। पुरुषों के नजर मात्र एक औरत होती है जो सम्मान के लायक होती है वो है उनकी माँ...बाकी जितने भी रिश्ते है उनके मामले में पुरुषों को प्रेम और सम्मान से पेश आना सीखाया ही नहीं जाता...अपने जीवनसाथी के प्रति अगर कोई पुरुष प्रेमपूर्ण व सम्मान की दृष्टि रखता है तो यही समाज उसे जोरु के गुलाम नाम से बुलाता है.. .बुरा मत मानियेगा पर भारत मे मर्द होने का मतलब है कि आप अपने घर की औरत को कितना नियंत्रण में रखते हैं इससे लगाया जाता है...जबकि मेरा मानना है कि असली मर्द होने की पहचान यह नहीं है...अगर एक स्त्री चाहे वो...
ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी ! एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ। किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया.... अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था। जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ ...